नींद

posted in: General | 0

नींद

पास ही कहीं दौड़ी चली गयी एक रेल
धडधडाती हुई सी बदहवास सी
चिल्लाती हुई, सन्नाटे को भेदती हुई सी
फिर भी कमरे में सोये हैं प्राणी बेखबर से
दिन भर की थकान ही होगी
या होगी कुछ ख़ुशी और सुकून भरी नींद
कि जिसने होश मदहोश से कर दिए हैं
वैसे भी यहाँ तो हर रोज़ रेल गुज़रती हैं
जिस जल्द बाजी में आती है
उसी सरपट गति से भाग जाती हैं
इनके लिए फिर कोई क्यूँ अपनी नींद ख़राब करे
यूँ  भी दुनिया में नींद बहुत महंगी जो हो रखी है

Garima Tiwari
IRTS(P)-2014

Garima Tiwari is a Music enthusiast, foodie and nature lover. She also composes poems and music for them. Currently she is exploring the colors and rhythms of Indian railways.

Comments

comments

Leave a Reply